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ईश्वर के संकेत...

Posted On: 17 Jan, 2014 Religious,Others में

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जैसा किसी का गुरु/पीर होता है। उसे मानने वाला क्षरधालु भी उसकी भांति बनने लगता है। उदहारण स्वरूप जैसे हम ईसाई की बात करते है। जीसस साक्षात प्रेम की मूरत थे, गरीब, दीन, दुखी का दुख हरना, सबसे प्रेम करना उनका मुख्य कार्य था। आज यदि हम देखते है तो उन्हे मानने वाले भी काफी हद तक समाज के नीचे तबके के लोगो की किसी न किसी तरह मदद कर रहे है, स्कूल, हॉस्पिटल, आवास ओर कई तरह से मदद कर सबमे यह विश्वास जगा रहे है की जब उन्हे मानने वाले ऐसे है तो फिर उनके गुरु या मसीह कैसे होंगे… कुछ लोग इनके कार्यो को देख ईर्ष्या वश यह कहने लगते है की यह धर्मांतरण करवा रहे है। लोगो को लालच दे रहे है। परंतु मुझे ऐसा नहीं लगता, की इस बात को हम कही से भी बुरा कहे। जिस व्यक्ति को कभी किसी समय एक दाना खाने को न था, घर की औरतों के पास पहनने को कपड़ा और सर ढापने के लिए घर न था, उस समय उनकी पुकार सुन जब ईश्वर ने कुछ लोगो को उसका नाम लेते हुए भेजा, जिनहोने सबसे पहले उन लोगो की भूख मिटाई, प्यास मिटाई, कपड़े-घर दिये ओर इस काबिल बनाया की वह भी ईश्वर को याद कर सके, तब उसे आप क्या कहेंगे। धर्मांतरण की साजिश या फिर किसी गरीब की मदद कर ऊपर वाले की राह पर चलना सीखाना। यदि कभी सच जानना हो तो दोस्तो उन गरीब लोगो के चेहरे के भाव देखना जो कितनी मुश्किलों के बाद ईश्वर कृपा से संभाल पाये है…
गरीब का कोई धर्म नहीं होता, वह न हिन्दू होता है, न मुसलमान, न सिख ओर न ही बोध। गरीब तो बस अपनी आवशयकताओ ओर भूख को जानता है। उसका धर्म मात्र रोटी। एक बड़ी ही मशहूर कहावत है:- भूखे पेट भजन न होत। बिलकुल ही सही कहा है। यदि व्यक्ति भूखा प्यासा ठंड से कांप रहा हो ओर आप उसे जाकर सिर्फ अच्छी अच्छी बाते सुनाये की ईश्वर तेरी भूख मिटाएगा, तेरी प्यास भूझेगी, तुझे कपड़े दे गर्मी प्रदान करेगा। परंतु वह व्यक्ति स्वयं समर्थ होते हुए भी उसकी कोई मदद न करे, तो क्या वो गरीब उसकी बात पर यकीन कर सकेगा? नहीं। ऐसा संभव नहीं है। ऊपर से शायद डर कर वह कह भी दे परंतु भीतर उसकी पुकार वैसी की वैसी ही रहेगी जब तक ईश्वर किसी न किसी माध्यम से उस तक मदद न पहुचाए। क्यूकी ईश्वर कभी भी स्वयं नहीं आते वह सदा अपने बंदो के लिए बंदो की शक्ल मे ही मदद करते है… मैने आज तक कभी ऐसा नहीं सुना की राम को मानने वाला गरीब प्रार्थना करे ओर स्वयं राम धनुष बाण लिए मुकुट धारण कर उसे रोटी देने आए या अल्लाह, जीसस या कोई भी अन्य मसीह स्वयं आए। बहुत पहले एक कहानी पड़ी थी कही:- एक नगर मे बहुत भीषण बाड़ आई, एक आदमी घर की छत पर खड़ा अपने प्रभु को याद करने लगा ओर कहने लगा ‘हे प्रभु आप मेरी रक्षा करे, आप रक्षा करे… इतने मे कही से एक नाव आई, उसने नाव को देखा परंतु उस पर चड़ा नहीं… बाकी के लोग उस पर सवार हो निकाल गए ओर वह इस आस मे फिर प्रभु को याद करने लगा की वह स्वयं उसे बचाने आएंगे। इस तरह 3 बार नाव आई ओर गयी। किन्तु वह व्यक्ति न चड़ा ओर अंत मे बाड़ के कारण डूब कर मर गया। जब मर कर वह ईश्वर के लोक मे पाहुचा, तब ईश्वर से शिकायत करने लगा की आपने मेरी रक्षा नहीं की जबकि आपको मे हृदय से स्मरण कर रहा था। यह सुन प्रभु मुस्कुराए ओर कहा:- मेने तो तेरी रक्षा हेतु 3 बार नाव भेजी, पर तू ही मूर्ख न समझ सका। की उस नाव को चलाने वाले को कौन चला रहा है।

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नवीनतम प्रतिक्रियाएंLatest Comments

yogi sarswat के द्वारा
January 23, 2014

सोच सोच की बात है अमर सिंह जी !


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