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मन रहस्य-1 (हाइकु)

Posted On: 2 Jul, 2014 Others,कविता में

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(1)
उलझे स्वर
मिश्रित भावदशा
गहन मौन
(2)
सुंदर चित्र
उड़ती तितलियाँ
खुला आकाश
(3)
अनंत राह
अनंत पगडंडी
एक जीवन
(4)
विस्मित हुआ
गहन ब्रह्मांड
सम्पूर्ण अंधकार
(5)
उगता सूरज
निगलता तिमिर
उड़ते पक्षी

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5 प्रतिक्रिया

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नवीनतम प्रतिक्रियाएंLatest Comments

PAPI HARISHCHANDRA के द्वारा
July 3, 2014

मन रहष्य कवि की कम शब्दों मैं सब कुछ कह देने वाली रचना है बधाई इस प्रयास मैं आप सफल रहे ओम शांति शांति 

ranjanagupta के द्वारा
July 3, 2014

साहित्य की एक संक्षिप्त पर प्रभावी व विधा! सुन्दर रचना!!सादर !!

amarsin के द्वारा
July 4, 2014

सादर धनयवाद हरिश्चंद्र जी।

amarsin के द्वारा
July 4, 2014

सादर धन्यवाद रंजना जी। भविष्य मे और अधिक बेहतर रचना का प्रयास रहेगा।

sadguruji के द्वारा
July 5, 2014

अच्छी रचना और कविता में नए प्रयोग ! इस कविता से बौद्धिक व्यायाम भी हो जाता ! बहुत बहुत बधाई !


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