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मन रहस्य-2 (ताँका)

Posted On: 4 Jul, 2014 Others,कविता में

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(1)
सीधा रास्ता
चलता जन-जन
छाते बादल
बरसती बारिश
भीगता तन-मन
(2)
भीगता मन
महकती पवन
उड़ते पक्षी
अनोखा सरगम
चहकता जीवन
(3)
गाता पपीहा
गरजती बिजली
नाचता मोर
सम्पूर्ण मधुबन
आलोकिक बंधन
(4)
उगती घास
बिखरती सुगंध
दौड़ता मृग
चंचल हरदम
रुकता इक-क्षण
(5)
कोमल काया
मनमोहिनी माया
मन दर्पण
देखता मेरा मन
जागकर हर क्षण

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12 प्रतिक्रिया

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नवीनतम प्रतिक्रियाएंLatest Comments

sadguruji के द्वारा
July 5, 2014

आदरणीय अमर सिंह जी ! सुप्रभात ! गागर में सागर भरी हुई बहुत भावपूर्ण और सुन्दर हाइकू कविता ! बहुत बहुत बधाई !

pkdubey के द्वारा
July 5, 2014

अति सुन्दर बही .सादर बधाई.

सुंदर भावपूर्ण अभिव्यक्ति ..बधाई सादर..

ranjanagupta के द्वारा
July 7, 2014

सराहनीय ,मन को छूने वाली रचना !सादर…!

deepak pande के द्वारा
July 7, 2014

काम शब्द ज्यादा गहराई गहन शोध काम लिखे यही है आपकी सच्चाई

amarsin के द्वारा
July 8, 2014

सादर धनयवाद योगी जी।

amarsin के द्वारा
July 8, 2014

धनयवाद दीपक जी।

amarsin के द्वारा
July 8, 2014

बहुत बहुत शुक्रिया…….. रंजना जी

amarsin के द्वारा
July 8, 2014

सादर धनयवाद शिल्पा जी।

Sushma Gupta के द्वारा
July 9, 2014

सभी तांका वेहद लाजवाव हैं , और मन की गहराई को छूने बाले हाँ …वधाई. .

amarsin के द्वारा
July 11, 2014

सादर धनयवाद


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