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रामराज्य हेतु कहां है राम?

Posted On: 29 Nov, 2014 Others,Politics में

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किसी समय हिन्दुस्तान में गांधी जी द्वारा रामराज्य की परिकल्पना की गई थी। देष में सभी वर्गों के साथ समान व्यवहार, समान न्याय व्यवस्था, समान अवसर और समान अधिकार प्रदान किये जायेंगे। देष का संविधान पूर्ण रूपेण धर्मनिरपेक्ष होगा। पराधीनता के समय जो-जो कष्ट देषवासियों ने सहे थे, उन सबसे देषवासियों को पूर्ण रूप से निजात मिल सकेगी। इस प्रकार की अनेकों अनेक बातें जो सुनने में अत्यन्त ही मनमोहक लगती हैं और जो उस समय जनता सुनना चाहती थी। वह सब प्रत्येक प्रकार से जनता के समक्ष कही गई। समाज में व्याप्त तमाम बुराईयों का अंत भावी सरकार करेगी जिनमें मुख्यतः जातिवाद, वंषवाद, गरीबी, निरक्षरता से मुक्ति उनका एजेंडा था जो आजादी के 69 साल बाद भी अभी तक वही के वही हैं। जातिवाद, वंषवाद, गरीबी, निरक्षरता अभी भी उसी प्रकार चल रही है जैसी आज से 69 वर्षों पहले थी। आज भी जनता का शोषण उसी प्रकार हुआ करता है जैसे 69 वर्ष पूर्व हुआ करते थे। हां, देष की सरकार ने आज तक बहुत उन्नति की है। तमाम कीर्तिमान स्थापित किये हैं जैसे गोधरा कांड, 1984 सिख नरसंहार, मुजफ्फरनगर कांड, सहारनपुर में भड़के दंगे, षिक्षक प्रषिक्षणार्थियों पर आये दिन होने वाले लाठीचार्ज, उत्तराखण्ड निर्माण के समय पुलिस कर्मियों द्वारा मेरठ कांड, ऐसे अनेकों अनेक दृष्य आज हमारे समक्ष खड़े हैं। ब्रिटिष राज में जितना धन अंग्रेज इस देष से लूटकर ले गये, अनेकों मुगल आक्रमणकारियों ने भारत में सदियों तक जितना धन लूटा, उसका बहुत बड़ा हिस्सा वह भारत को बहुमूल्य कलाकृतियों, अविष्कारों और संस्कृति और भाषा के रूप में देकर भी गये। लेकिन देष की वर्तमान स्थिति को देखकर अत्यन्त ही दुख के साथ कहना पड़ रहा है कि देष की आजादी के बाद से यदि सरकार की तुलना हजारों सालों की गुलामी, मुगल सल्तनत, अंग्रेजी षासन द्वारा किये गये अत्याचार और लूट-खसूट से की जाये तो हिन्दुस्तानी शासन अवष्य ही पहली पंक्ति पर खड़ा मिलेगा। इसके प्रमाण अभी आगे मिलेंगे।

धर्मनिरपेक्षता की यदि बात की जाये तो भारत अत्यन्त ही धर्मनिरपेक्ष देष है जहां पर जाति, धर्म और चमचागिरी के आधार पर किसी भी व्यक्ति को न परख कर व्यक्ति की योग्यता, कुषलता, अनुभव, ईमानदारी और मेहनत उनकी योग्यता से आंकलन होता है। देष में ईमानदारी की बात की जाये तो सम्पूर्ण विष्व में भारत ने इसका कीर्तिमान अपने ही नाम किया हुआ है। देष शत-प्रतिषत ईमानदारी की ऊंचाईयों को छूते हुए सम्पूर्ण विष्व के लोगों द्वारा आदर एवं विष्वास की दृष्टि से देखा जाने लगा है। देष का नेतृत्व करने वाले तमाम नेता, शासन-प्रषासन के अधिकारियों ने अपनी ईमानदारी और कर्तव्यनिष्ठा का प्रमाण जिस प्रकार अपने कार्यों द्वारा दिया है। उससे उन्होंने प्रत्येक चुनावों में अपनी कही जाने वाली इस बात पर सत्यता का प्रमाण दिया है कि वह देष से गरीबी हटा देगें, अपनी सत्यनिष्ठा हेतु फिर चाहे देष के गरीबों को ही क्यों न मिटाना पड़े, मिटा देना चाहिए। आखिर गरीबों को जीने का अधिकार ही कहां है। गरीब तो उस प्राणी का नाम है जो व्यक्तियों की श्रेणियों में आता ही नहीं, वह मात्र एक वोट और एक नंबर है। जिसका प्रयोग मात्र चुनाव के समय गणना हेतु किया जाता है। कभी किसी अन्य के नम्बर बढ़ते हो तो कम गिनती पाने वाला, विरोधी पक्ष के मात्र नम्बर ही तो काटता है, इसमें बुरा भी क्या है।

वास्तव में वर्तमान समय में पद और सत्ता का मोह शासक वर्ग पर इस कदर हावी है, फिर चाहे वह कांग्रेस हो, भाजपा या कोई और अन्य पार्टी। हर कोई मात्र अपनी-अपनी रोटी सेकने में लगा हुआ है। रामराज्य कहां है किसी को कुछ नहीं पता और न ही किसी को आवष्यकता ही है कि रामराज्य आये। आखिर कहां से आयेगा राम राज्य। यह प्रष्न सामने आते ही हर कोई इधर-उधर देखने लगता है कि शायद आकाष से उड़ते हुए कहीं से राम आयेगे, जो देष में राम राज्य की स्थापना कर देष की जनता के समस्त दुख मात्र एक क्षण में दूर कर देंगे। यह भ्रम कितना हास्यापद है, कि हम सभी अपना सिर षुतुरमुर्ग के समान जमीन में सिर गड़ाये बैठें हैं कि सब कुछ ठीक है। कहीं से कोई खतरा नहीं। यदि है भी तो अभी मुझ पर तो नहीं है और दूसरे से हमें क्या लेना? बस यही सोच हम सबको व्यक्ति न बनाकर मात्र एक नंबर बनाकर रख देती है। जिसे कोई भी, कभी भी, किसी भी प्रकार से प्रयोग कर, बड़ी ही सरलता से मिटा सकता है। आखिर ठीक ही तो है, नंबर तो आखिर नंबर ही है, कोई वास्तविक मनुष्य तो नहीं…….!!!!

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3 प्रतिक्रिया

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नवीनतम प्रतिक्रियाएंLatest Comments

puneetmanav के द्वारा
November 29, 2014

इसमें कोई संदेह नहीं कि भारतीय राजनेता सदैव से ही भारत की जनता को अपने हाथ की कठपुतली बनाने की कोशिश करते रहे हैं। और इसके लिए उन्होंने जाति, धर्म जैसे हथियारों का प्रयोग किया है।

sadguruji के द्वारा
December 2, 2014

सार्थक और विचारणीय रचना ! मंच पर प्रस्तुति के लिए हार्दिक आभार !


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