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किसी भी कौम के सभी लोग अच्छे नहीं होते तो सभी लोग बुरे भी नहीं होते। मजहब तो दिलों की बात है।

Posted On 7 Jul, 2016 Religious, social issues में

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सच ही तो है हाथों की उंगलियां सभी बराबर नहीं होती। हम अक्सर किसी कौम को निषाना बनाकर उसे मानने वाले सभी लोगों के लिए अच्छी या बुरी कोई राय बना लेते हैं। जब से इंसान पैदा होता है वो किसी खास मजहबी माहौल को अपने चारो ओर देखता है। उसके मां बाप, भाई बहन, दोस्त, रिष्तेदार आदि किसी खास मजहब से ताल्लुक रखते हैं और उसे एक खास नजरिये का चष्मा पहनाकर किसी और मजहब के लोगों के बाबत बताया जाता है। जिस कारण हम उन्हें अपने से कुछ अलग महसूस करने लगते हैं। हिन्दू परिवार के पैदा होने वाले बच्चे को बचपन से ही ऐसा कुछ बताया जाता है कि मुसलमान बहुत क्रूर स्वभाव वाले, हिंसक और सख्त दिल लोग होते हैं और इसी तरह और मजहबों में भी मुसलमानों के प्रति नजरिया कुछ खास अलग नहीं। लेकिन अगर कोई खोजी बुद्धि वाला व्यक्ति जो सुनी सुनाई बातों पर यकीन न कर, खुद अपने अनुभवों के आधार पर बात करता हो, तो वह वह धीरे-धीरे अपने इन पूर्वाग्रहों से खुद को अलग पाता है। जो बातें अक्सर हमें समाज सिखाता है, वो सभी हमें अक्सर सच ही प्रतीत होती हैं। लेकिन ऐसा अक्सर होता नहीं कि उनमें सभी कुछ सच ही हो।
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जैसा कि किसी खास कौम के लोग बहुत बुरे होते हैं और कोई खास कौम गरीबों को जालिमों के जुल्मों से बचाने वाली है अर्थात रक्षक कौम है। जो आज इस समय में अब तक मौजूद है। इस बारे में यदि खुलकर कहें तो सिक्ख के लिए कह सकते हैं।
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सिक्ख कौम एक ऐसी कौम है जो ऐसे समय में उत्पन्न हुई जब मुगलों का अत्याचार हिन्दुओं पर अपनी चरम सीमा पर था। इस पर ऐसा नहीं कहा जा सकता कि इस्लाम का अत्याचार हिन्दुओं पर था। बेषक उस समय का बादषाह एक मुसलमान था जैसा कि आज के समय पर अनेकों आतंकवादी इस्लाम से ताल्लुक रखते हैं लेकिन वास्तव में उनका इस्लामी उसूलों से दूर-दूर तक कोई नाता नहीं। इसी प्रकार मुगलों के शासनकाल में अनेकों ऐसे राजा हुए जो तानाषाही कर सब पर अपना दबदबा बनाकर खुषी हासिल करते थे और उसे इस्लाम का नाम देकर पाक साफ होने की कोषिष कर देते थे। ऐसे माहौल में सिक्ख धर्म का उदय हुआ। जब हिन्दू धर्म से सिक्ख धर्म का उदय हुआ। सिक्ख धर्म का इतिहास अनेको वीरगाथाओं और शहीदीयों से भरा हुआ है और जिसे आज तक सभी सिक्ख गुणगान का गौरवान्वित महसूस करते हैं और कहते नहीं थकते कि आज भी वह मजलूमों की रक्षा के लिए ही बने हैं लेकिन यदि इन इतिहासिक कहानियों से बाहर निकलकर आंखें खोलकर समझकर और बूझकर देखें तो वास्तविक कुछ और ही दिखती है। पुरातन सिक्ख हुए हैं जो वाकई धर्म की सभी सीमाओं को पार करके उसके चर्मोत्कर्ष तक पहुंच गये लेकिन आज के समय में सभी तो ऐसे नहीं, यह सभी को पता है लेकिन न जाने किस भ्रम में वह आज भी जी रहे हैं कि वह रक्षक हैं और भक्षक को मार मिटाने वाले हैं।
समय का चक्र कभी किसी के लिए नहीं रूकता और सदा परिवर्तनषील है। जो कभी भक्षक था अर्थात कोई निर्धारित व्यक्ति और कोई कभी रक्षक था अर्थात कोई निर्धारित अन्य व्यक्ति विषेष। लेकिन हम उसे व्यक्ति की व्यक्तिगतता न समझकर उसे पूर्ण समूह पर लागू कर देते हैं जो पूर्ण रूप से ही गलत है। हाथ की अंगुलियां सभी बराबर नहीं होती।
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ठीक इसी प्रकार रक्षक और भक्षक की बात करें तो यह तो धर्म के एकदम बाहर की बात है। इससे धर्म का कोई लेना देना नहीं। हां यह अवष्य कह सकते हैं भक्षक या रक्षक जब किसी खास कौम या मजहब का हो तो वह उस उक्त कार्य को अपने धर्म के हिसाब से सही साबित करने के लिए अनेकों धार्मिक तर्क देने लगता है। लेकिन यदि उसका परिणाम मानवजाति के लिए हानिकारक हो तो वह कैसे किसी भी धर्म के लिए सही हो सकता है।
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इस्लाम के पैगम्बर मोहम्मद साहब जब अपने दुष्मनों को जंग में हराकर उन्हें मारने के बजाये उन्हें माफी देने पर यकीन रखते हों जबकि उन दुष्मनों ने ऐसी कोई कसर न छोड़ी हो जिससे उन्हें व उनके लोगों को ज्यादा से ज्यादा जान और माल का नुकसान हो तो कैसे हम कह सकते हैं कि उनके उसूल किसी मासूम की जान ले सकते हैं? वहीं दूसरी ओर सिक्ख धर्म में सिक्ख गुरूओं ने और अनेकों अनेक सिक्खों ने अपनी जान औरों के लिए इसलिए कुर्बान कर दी हो कि वह शांति और सुरक्षा का माहौल बना सकें।
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लेकिन होता कुछ और ही है, न तो वो लोग ही रहे और न ही वह समय। समय सदा परिवर्तनषील है। बस रह गये हैं उसूल। जो उन पर उसी प्रकार चलते हैं जैसा उनके पैगम्बर चाहते थे और चलते थे वही असल में उस धर्म के सच्चे खिदमदगार हैं। फिर चाहे वह हिन्दू हो, मुसलमान हो, सिक्ख हो या ईसाई। जिस किसी पैगम्बर के उसूल आपके दिल को छूते हों और उस पर आप चलने को राजी हों वहीं असल में आपका धर्म है और कोई भी धर्म कभी किसी से वैर करना नहीं सिखाता।
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मौहब्बत से तो खुदा भी खुष होता है,
एक बार सच्चे दिल से मौहब्बत कर के तो देख।

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1 प्रतिक्रिया

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नवीनतम प्रतिक्रियाएंLatest Comments

vikaskumar के द्वारा
July 8, 2016

बड़ा अच्छा लिखा है .


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