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किसी औरत या पुरूष से संबंध बनाने के लिए क्या प्रेम ही काफी नहीं?

Posted On 28 Apr, 2017 लोकल टिकेट में

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लिव इन रिलेषनषिप को लेकर तमाम लोगों के लिए एक बहस का मुद्दा है लेकिन जहां यह विषय बुद्विजीवी वर्ग के लिए सोचने का विषय है कि आखिर क्यों लोग आज विवाह से अन्यत्र एक ऐसे विकल्प को तलाष रहे हैं जो वास्तव में वह ढूंढ रहे हैं। आखिर ऐसा क्या है जो उन्हें आज उपलब्ध सामाजिक व्यवस्था में नहीं मिल पा रहा है? और वह अवष्य ही प्रेम ही है।
प्रेम एक ऐसा भाव है जो प्रत्येक व्यक्ति चाहे वह स्त्री हो या पुरूष, प्रत्येक उसे चाहता ही है। आखिर विवाह की व्यवस्था रखने का महत्वपूर्ण प्रयोजन ही यही था कि आदमी और औरत जो सारी जिन्दगी एक साथ रहते हैं और अपने परिवार को आगे बढ़ाते हैं और एक दूसरे की जिम्मेदारी लेते है और अपनी सन्तान की जिम्मेदारी लेते हुए, अपने सम्पूर्ण परिवार का दायित्व निभाते हैं। उन सबका आधार अंत में पे्रम ही निकलता है। बिना प्रेम के आखिर यह सब व्यर्थ ही तो है। जब प्रेम ही न होगा तो इन सबका क्या प्रयोजन?
आज प्रेम को लेकर अनेकों प्रकार की सामाजिक और धार्मिक बंदिषें लगाने वाले अनेकों लोग मिल जाते हैं जो प्रेम को छोड़कर नफरत और हिंसा अधिक फैलाते हैं लेकिन वह आखिर यह भूल जाते हैं मानव का जो वास्तविक स्वभाव है वह सदैव प्रेम को ही ढूंढता है और प्रेम की ही ओर आकृर्षित होता है। तभी यह देखने को मिलता है कि उन्हीं नफरत फैलाने वाले लोग स्वयं ही चोरी छुपे ही सही कहीं न कहीं प्रेम को तलाषने ही लगते हैं फिर चाहे वह अपने शरीर का सौदा करने वाली कोई तवायफ ही क्यों न हो। आखिर वो भी तो कोई स्त्री ही है। अब चाहे इसे हम प्रेम कह लें या हवस। इसमें बस तार भर का फर्क ही है कि आखिर इन्सान क्यों इस और जाता है और क्या वह ढूंढता है जो उसे मिल न सका। यह विचार करने का विषय है।
प्रेम एक ऐसा भाव है जिसे मात्र समझने भर की आवष्यकता है कि वास्तव में वह है क्या? और असल में प्रेम कोई समझने का विषय न होकर एक जीवन्त भाव है जिसे प्रत्येक व्यक्ति को जीना है। यदि कोई इस भाव को सही प्रकार से जी नहीं पाता तो वह जीवन भर चाहे कितने ही लोगों में क्यों न इसे ढूंढता रहे, वह प्रेम को मरते दम तक समझ नहीं सकता क्योंकि जिसने समझ लिया उसके लिए मात्र कुछ क्षण ही पर्याप्त हैं और जो न समझ सका वह जीवन भर इसी दौड़ में इस पवित्र प्रेम को भोग विलास बनाकर उसमें जुझता ही रह जाता है……

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1 प्रतिक्रिया

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नवीनतम प्रतिक्रियाएंLatest Comments

harirawat के द्वारा
April 29, 2017

वशर्ते प्रेम केवल वासना और सम्बन्ध बनाने तक ही सीमित न हो !


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